कोरोनाबाबा की सवारी !

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जब से आयी कोरोनाबाबा,
तुम्हारी सवारी ।
सभी ने कर ली, तुम्हारे
स्वागत की तय्यारी ॥

अस्पतालों में सफाई, हो रही
कईबार ।
डाक्टर कर रहे, रोगी का
इंतजार ।
देखकर द्रश्य, आँखे चौंक गयी
हमारी ।।

भारतीय सभ्यता को तुमने,
विश्‍व में फैलाया ।
दुर से ही हात जोडना, सब को
सिखलाया ।
एकही झटके मे सुधार दी, तुमने
दुनियाँ सारी ॥

करोडो रुपयों के पुतले, खडे
है यहाँ ।
अस्पताल के बगैर लोक, मर रहे
है वहाँ ।
सारा हाल दिखा के, आँखे खोल
दी हमारी ॥

देश के गुनाहगारों को तुम,
भले ही ले जावो ।
मंत्री हो या संत्री,
भ्रष्टाचारीयों को भगावो ।
लेकीन सज्जनों पर हो बाबा,
कृपा तुम्हारी ॥

मिसाईल हमारे, रह गये धरे के
धरे ।
अ‍ॅटमबम्ब भी सड रहे, सारे के
सारे ।
अकल लायी ठिकाणे, बाबा तुमने
हमारी ॥

बुलेट ट्रेनों की तुमने,
बुलेट निकाली ।
हवाई जहाजों की तुमने, हवा
निकाली ।
अब कोई न करेगा, बाबा विदेश
सवारी ॥

परदेश जाने को लोग, सब थे
तय्यार ।
किसी को भी न था, देश सेे
प्यार ।
अब घरों मे कैद पडी है, जनता
सारी ॥

-संजय महल्ले

अमरावती.
मोबा. 9423622667